पडी आज देखी किनारे सडक पर
कोई अपनी बेटी को फिर फेक गया है।
दिल है या पत्थर,पता ही नही अब
बेटियों के लिए प्यार,पनपता क़यू नही अब?
समस्या यह सदियों से गहरी चली आ रही है
भ्रूण हत्या को अब रोकता क़यू नही कोई अब?
मर जाएगी गर सभी बेटियाँ पेट मे ही
संसार सुंदर दिखेगा नही फिर अब।
बेटियाँ होती उजाला,दो दो घरो की
फिर हम क़यू अँधेरा लाने पर तुले अब।
मेरा दिल है रोता,करता सबसे निवेदन
बेटियाँ है लक्ष्मी,इक कोमल परी है
सबके घर को महकाती,सबकी सेवा करी है।
मारने से पहले जरा सोच लेना
किसकी चाहत मे हम ऐसा कुकर्म किए है।
बेटियों को अब बचाना है
जन जन संदेश पहुँचाना है
बेटी बचाओ,बेटी पढाओ।।
-आकिब जावेद