बच्चे होते कांच से कांच सा होता हैं मन जैसा ढालो ढल जायेगा छोटा सा होता हैं तन खेल खेल में सीखते अक्कड़ बक्कड़ बोलते बम नही फ़िक्र रहती कल की आज की ही सोचते, खेलते रहते हरदम बच्चे होते कांच से कांच सा होता हैं मन लड़ते,झगड़ते, खेलते,कूदते छोटे छोटे से हैं हम जैसा सिखाओ सिख जाएंगे नैतिकता को माने हम अच्छे अच्छे पाठ पढ़ाओ कांच सा होता इनका मन!! ®आकिब जावेद