ये कैसी पहेली अब बुझाते हो पहले तो ऐसे ना थे अब क्यू ऐसे नजर आते हो। हमने तो अक्सर तुम पर एतबार किया लेकिन तुम तो हमेशा दूर ही नजर आते हो दोस्ती की हैं तुमसे,कोई हर्ज नही तुम ऐसे ज़माने से फिर क्यू डरते हो लोग हैं काम हैं उनका बोलना फिर क्यू तुम इतना घबराते हो बोल दो जो बोलना हैं खुलकर क्यू फिर दिल की बात दिल में रखती हो हमेशा साथ दिया,तुमपे ही एतबार किया फिर क्यू हमेशा बदले बदले से लगते हो दिल था मेरा ये कोई खिलौना नही था फिर क्यू ऐसे इससे खेलते रहते हो दिल की चोट को दिखाऊ किसको तुमने तो हमेशा इसको तोडा हैं उम्मीद उठी हैं दिल में अबभी क्यू कि तुमतो रोज मेरे सपने में आती हो।। -आकिब जावेद