ठोकरजो सिखाती है,आगे बढ़ना।ढकेलने से बचा लेती है,गड्ढों में।जिसमें भरी हुई है,नीरसता,उबकाई,तैयार है,समा जाने कोअंतः मन में।बचा लेगीठोकर,जाने सेगड्ढों में।