सवैया's image

जग में सबसे हम तो मिलते,

हँसते रहना इक़ आदत है।

दुख साथ रहे फिर भी चलते,

चलते रहना बस जीवन है।

मन जो अपना कर ले वश में,

सध जाय नहीं रुकता फिर है।

विपदा ख़ुद ही फिर है टलती,

डर जीत चुका विजयी वह है।

पथ के कुचले हर कंटक को,

भ्रम मुक्त रहे दृढ़ता पर है।

अब काज नहीं रुकता उसका, 

परमातम से उसकी लिव है।

अब नाज़ करे दुनिया

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