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नकाब


कभी न देखे ख़्वाब इतनेनकाब में ही नकाब इतने

कभी वो भी थे बेताब इतनेहै जाने को अब शिताब इतने

है दर्द के क्या सवाल तेरेतन्हा तन्हा से जवाब इतने

छुपी हुई है तन्हाई मेरीहै ज़िन्दगी में यूँ बाब इतने

बाब-पुस्तक का अध्याय

— आकिब जावेद
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