कदम दर कदम चलते गएबुलंद हौसलों से बढ़ते गएज़ुनून यूँ था घर पहुँचने काखुद के डर से यूँ लड़ते गए
कदम दर कदम चलते गएबुलंद हौसलों से बढ़ते गए
ज़ुनून यूँ था घर पहुँचने काखुद के डर से यूँ लड़ते गए