ग़म की चादर...ओढ़कर
अपने पेट को..मरोड़कर
खून पसीना.....निचोड़कर
पाई-पाई पैसे .. ..जोड़कर
रास्तों के पत्थर..तोड़कर
चल दिए शहर...छोड़कर
#akib #मजदूर


ग़म की चादर...ओढ़कर
अपने पेट को..मरोड़कर
खून पसीना.....निचोड़कर
पाई-पाई पैसे .. ..जोड़कर
रास्तों के पत्थर..तोड़कर
चल दिए शहर...छोड़कर
#akib #मजदूर