कविता - स्कूल's image
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कुम्हलाई आँखे 

ताक रही थी,

रास्ता स्कूल का

नाप रही थी।

रंग-बिरंगे चेहरे पे

उदासी बाहर से

झांक रही थी।


फूल खिलने लगे

लालिमा बिखरने लगी

भोर हो गया है,

तिम

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