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झूठ


झूठस्वयं इक कविता है,सही को गलतसाबित करने मेंगढ़ी जाती हैमनगढ़ंत बाते,जिसका नही हैअस्तित्वनकार जाता हैस्वयं वो व्यक्तिजिसने गढ़ी हैमंगढ़त कहानियां।

— आकिब जावेद
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