एजेंडे सेट हो गए

दुकान तैयार हो गयी

सब बेचेंगे अपना माल

सवाल लेकिन यही है

सबको अपना माल लगता प्यारा

दूसरे में खोट नज़र है आता

अच्छा-बुरा हमको देखना नही

हमकों कुछ भी पढ़ना नही

क्यो की दूसरे का माल ख़राब है,

इंकलाब जिंदाबाद है!

इंकलाब जिंदाबाद है!

-आकिब जावेद