यूं तो मुझे रंग डाला मेरे यार ने
की है मुहब्बत भी बयां दिलदार ने
रूख़ी उसे रोटी खिला सकता नहीं
उफ़्फ़ उड़ाया होश इस बाज़ार ने।
-आकिब जावेद


यूं तो मुझे रंग डाला मेरे यार ने
की है मुहब्बत भी बयां दिलदार ने
रूख़ी उसे रोटी खिला सकता नहीं
उफ़्फ़ उड़ाया होश इस बाज़ार ने।
-आकिब जावेद