इंतेज़ारशब भर जाग करनींद को त्याग करमहबूब की याद मेंहो जाना मशगूलसिर्फ़ इस उम्मीद में,आएगा वो शख़्सजिसकी याद मेंहिज़्र में बिता दिएजो दिन गिन गिनलिपटा लेगा यादोंको और मुहब्बतबिखेर देगा जिस्म में।।