बशर करते फ़क़ीरी में लकीरों पर नही चलते
अमीरों के अदब कोई फ़कीरों पर नही चलते
कि चढ़ता हैं नशा कुछ कर गुजरने का नया हरदम
निकाले रेत से पानी नज़ीरो पर नही चलते
जो रखते सोच गांधी की हिंसा से दूर रहते हैं
मुहब्बत सीखा हो जिसने तीरों पर नही चलते
-आकिब ज़ावेद
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