अतुकांत कविता: नयापन's image
740K

अतुकांत कविता: नयापन

एकांत कोने में

गुमसुम सी कहीँ

छुपी हुई है

मेरे अंदर एक

तन्हाई

जो पुकारती है

मुझे सालो से

एवं देखती है

मेरे अंदर छुपे

वात्सल्य को

प्रेम को

जो उड़ेलना

Read More! Earn More! Learn More!