अपने अपने किरदारों को ढूँढता कौन है।।कोई मरता हो मरे यहाँ सोचता कौन है।।अपने अपने मज़हब को यहाँ सब मानेंगे।।एक - दूजे को अब यहाँ रोकता कौन है।।- आकिब जावेद#akib #PoetsTwitter @kavishala
अपने अपने किरदारों को ढूँढता कौन है।।कोई मरता हो मरे यहाँ सोचता कौन है।।
अपने अपने मज़हब को यहाँ सब मानेंगे।।एक - दूजे को अब यहाँ रोकता कौन है।।
- आकिब जावेद
#akib #PoetsTwitter @kavishala