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अशआर


अपने अपने किरदारों को ढूँढता कौन है।।कोई मरता हो मरे यहाँ सोचता कौन है।।

अपने अपने मज़हब को यहाँ सब मानेंगे।।एक - दूजे को अब यहाँ रोकता कौन है।।

- आकिब जावेद

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