तुझसे बिछड़े तो ये समझ आई.
जिन्दगी सिर्फ तू नहीं !! साईं.
घर से बेदख्ल कर गया हूँ सो.
तू भी दिल से निकाल दे !! साईं.
शाम को एक परी से मिलता हूँ.
शाम को मुझसे न मिलो !! साईं.
घर की दीवार मुन्हदम कर दी.
घर किसी काम का नहीं !! साईं
हिज़्र की रात काटनी थी मुझे.
हिज़्र की रात कट गई !! साईं
#अखलाक_साहिर


