ये आंसू है पगली आँखों से भी निकलते है और दिल से भी
ख़ुशी में भी झलकते है और गम में भी |
यार मिले तो भी और यार जुदा हो तो भी ||
ये आंसू है पगली आँखों से भी निकलते है और दिल से भी
इनका न कोई दीन है न कोई धर्म |
हिन्दू के भी झलकते है और मुस्लिम के भी ||
कोई आये दुनिया में तो भी और कोई जाए तो भी |
कोई प्यार करे तो भी और कोई बिछड़ जाए तो भी ||
ये आंसू है पगली आँखों से भी निकलते है और दिल से भी
इनका न कोई दीन है न कोई धर्म |
मंदिर में भी निकलते है और मस्जिद में भी ||
यादों में भी निकलते है और दुआओं में भी |
अपनों के भी निकलते है और परायो के भी ||
ये आंसू है पगली आँखों से भी निकलते है और दिल से भी |
