बच्चे थे, अच्छे थे, साथ रहते थे, कब बड़े हुए पता ही न चला |
घूमते थे माँ-बाप के कांधो पर, कब दुनिया घूमने लगे पता ही न चला ||
लिखते थे कलम से, कब कीबोर्ड हाथ में आ गए पता ही न चला |
शाम का खेलना दोस्तों के साथ, कब पार्टियों में बदल गया पता ही न चला ||
मिटटी के गुड्डे-गुड्डियों से खलेते थे, कब असली से खेलने लगे पता ही न चला |
कभी बच्चे थे, अब बाप बनने लायक हो गए पता ही न चला ||
परिवार में साथ रहते थे, कब अपना परिवार बनाने की सोचने लगे पता ही नचला |
बच्चे थे,अच्छे थे, साथ रहते थे, कब बड़े हुए पता ही न चला |ा ||
