क्या अजीब दस्तूर है दुनिया का कहते है ....

जहाँ की परवाह करते है जबकि खुद से डरते है |

ढूंढने चले खुदा !

मिट्टी की मूरत बना !

बड़े-बड़े मंदिर मस्जिद बना !

पूछा उन बनवाने वालो से तो,

पता चला खुदा मिलता हर जगह !!

प्यार और व्यापार में एक फर्क समझ में आया !

एक देने का काम है और दूसरा लेन-देन का !!

वो आज भी हमें देख अपना कहते है |

अब उन्हें क्या समझाए अपने और अपनाने में कितने फर्क है!!