आज तो आकर मिल जाना
बड़ा अरसा हुआ तुझको देखे
क्या क्या कुछ भी तुझको याद नहीं
जो सपने हमने संग देखे
बस एक बार तू आ जाना
मेरे हाथ का खाना खा जाना
थक चुकी हूं दीवारों से बातें करके
कुछ अपनी कहना कुछ मेरी सुन जाना
जिसके पीछे तू भाग रहा
भगवान करे तुझे सब मिले
डर लगता है कहीं मैं पीछे खो जाऊं
तुझको बिन देखे गहरी नींद में सो जाऊं
लड़ती हूं खुद से रोज में
तू एक दिन जरूर आएगा
समझाती हूं खुद को रोज यही
क्या कोई कागज का टुकड़ा एक मां की जगह ले पाएगा

