न हो किंचित मन उदास
जिंदा रख अपनी आस-प्यास
कल होगी प्रस्फ़ुटित प्रकाश रेखाएँ
बिखरेगी खुशियां , निखरेगी दिशाएँ
हो बस इतना कि , धीर भावना प्रखर हो
अविचल हो , प्रबल हो , वृहद हो , सरल हो
न डिगे , न डरे , मन-तन की वो कहानी हो
चाहे हो कोई अपमान , या चाहे तेज़ सुनामी हो
