पद्य की चुप्पियों में मरता प्यार, 

गद्य होता, अमर होता।  

शब्दों में भाव कुंठित

अस्त रहे, यदि बोल होते  

हृदय में समर होता। 

पद्य की चुप्पियों में मरता प्यार 

गद्य होता, अमर होता।  

शब्दों से अलंकार रचा कर 

लय भर कर, रस दिखला कर, 

फीका लगता श्रृंगार 

यदि रूप पे होता, 

तो भ्रमर होता 

पद्य की चुप्पियों में मरता प्यार 

गद्य होता तो अमर होता।

@Guptaarsh