मैं आवाज हूँ,
बातों को मेरी बस सुना करो,
न माँगो मिलने के वादे,
न मेरी शक्ल बुना करो।
मुझसे मिलने पर;
तुम दूर भाग सकते हो,
प्रेम स्वप्न मेरा तोड़ कर
तुम जाग सकते हो।
नहीं, मैं इतना कुरूप नहीं,
जो तुम डर जाओगे!
पर कोई हीरो वाला अंदाज भी नहीं पाओगे
मुझे डर है थोड़ा कि
मेरी बातों में
मेरा धर्म ढूंढ़ना चाहोगे,
पर अफ़सोस होगा तुम्हे
ढूंढ नहीं कुछ पाओगे
मेरी बातों में घुला है धर्म सनातन
जो मैं सुनता आया।
बचा है इस्लाम बहुत
सूफी इश्क़ का भरमाया
सिखों की गुरबाणी के भी
बोल एक दो पा जाओगे
धर्म देखने निकलोगे,
हिंदुस्तान पर आ जाओगे।
फिर मेरे शब्दों में
तुम धर्म देखना चाहोगे,
हिंदी देखकर अच्छी सी
हिन्दू ही बतलाओगे।
पर मत भूलो, मैं
शायर घर का बेटा हूँ;
एक गजल सुनकर उर्दू की
मूक से रह जाओगे।
इंग्लिश भी थोड़ी सी मेरी फरार्टेदार है
'ओह गॉड' वाला जीसस भी मेरा प्यारा यार है
फिर मायूस होंगे हाथ मले रह जाओगे
धर्म ढूंढ़ने निकलोगे
हिंदुस्तान पा जाओगे।
हां एक डर ये बड़ा मिलने का है,
की हमारी पोशाकों मे भी
धर्म कुंठित रहते है।
और फल फूल जीव जल कीड़े मकोड़े
सभी धर्म कहते है
मैं तिरंगा हूँ हर रंग लिए
विभिन्नताओं को संग लिए
देख नहीं कुछ पाओगे
धर्म देखने निकलोगे
हिंदुस्तान पा जाओगे ।
चलो मैं खुद बतला देता हूँ तुमको
मैं हिन्दू हूँ या कहो सनातन
मुझे इस पर गर्व बहुत हैं ,
इसके अनूठे अद्वित्य शास्त्र पर
मेरा अपना मर्म बहुत है ।
पर एक मित्र जो हर बार हमेशा
लिख देता है शब्द हजार
जन्मदिन पर देता ढेर प्यार का उपहार
जो मुझको इतना प्यार दिखलाएगा,
कैसे वो मुसलमान बुरा बन पाएगा!
एक मेरी है बहन बड़ी
मेरा खाना खा जाती है,
किस और लगा है रोटी के घी
देख नहीं वो पाती है !
सही गलत की बात अच्छे से समझाती है
मुस्लिम है वो,
पर नजरो में मेरी बस बहन ही रह पाती है
और कुछ छोटी जाती के मित्र जो बात बड़ी जो कर जाते है
मुझे बनाकर छोटा, दिल तख़्त पर आते है
हा मैं हिन्दू हूँ, स्वर्ण जाती का
पर मुझमे तुम ये सब पाओगे,
मैं हिंदुस्तान हूँ,
मुझमे धर्म नहीं तुम पाओगे।
तुम मेरी आवाज सुनो बस
जिसमें भूख की आवाजे है,
खंडहर, खोकले तंत्र के
सुरक्षा में खुले दरवाजे है।
उत्तम मस्तिष्कों की छटपटाहट सुनो
सुनो देश की आहट सुनो
मत बांटो गीता कुरआन के संदेशो को,
मत छिपाओ बर्बादी के अंदेशो को
तुम देश की आवाज सुनो
तुम मेरी आवाज सुनो।


