तेरा ग़म जो मैं उठता चला गया

धीरे-धीरे ही सही खुद को निभाता चला गया

तू किसी महलों की रानी-सी बन गई

मैं ख़्यालों में तुझको अपनाता चला गया ।।


हर परस्तिश से तोड़ के खुद को

दिल में इक घर बनाता चला गया

और इक दिन जब तू यहाँ भी रूठ गई,मुझसे

खुदा जाने मैं कहा जाता चला गया।।


तेरा ग़म जो मैं उठता चला गया।।

#आकाशा