कुछ तो जीने में राहत-सी आने लगी हैं,

लगता हैं तेरे आने की आहट-सी आने लगी हैं।

ये बेचैन दिन सुकून से रहने लगा हैं,

रंजो-ग़म की हर खालिश अब जाने लगी हैं।

वो बेवफा हैं तो क्या हुआ,ये तो दस्तूर हैं उनका,

नादानी मेरे दिल की भी अब जाने लगी हैं।

ऐ मौत!तू इतनी हसीं थी,मैंने पहले तुझे क्यू नहीं चाहा?

तेरे आने से अब ज़िन्दगी-सी आने लगी हैं।। 

#आकाशा