वो वक़्त जो तेरी यादों में घुल के बीत गया

तुझे पता नहीं हैं मेरा इन्तजार ऐसे भी जीत गया


ये उधेर बून क्या हैं जो अब तक आई नहीं तू

फासला ए दरम्यान ए इश्क़, आज फिर जीत गया


आज फिर किसी लकड़हारे की कुल्हाड़ी तालाब में गिर गई

कोई यक्ष उसे लेकर नहीं आया और एक पेड़ जीत गया


इम्तिहान ऐ खुसबू के बाजार में हर इत्र मौजूद थे

तू बाजार से गुजरी और तेरा जिस्म जीत गया


अजब फलसफा इस ज़िन्दगी की खूदा ने बनाई

लोग जीने की जद्दोजहद करते रहे पर मौत जीत गया


वो मेरे हर इल्म में ऐसे मौजूद हो गई

मैं इश्क़ में हार के सबकुछ उसको जीत गया ।

#आकाशा