लहू आँखों में ला भी नही सकता
मैं अपना ग़म किसी को बता भी नहीं सकता
वो ख़्वाब जो हर आँखों से चुरा लिया ज़माने ने
मैं ऐसे ज़माने को छोड़ कर जा भी नहीं सकता
की तुम मेरी हो तो फिर मेरी ही रहना
मैं किसी और का साथ अब निभा भी नहीं सकता।
#आकाशा।।


लहू आँखों में ला भी नही सकता
मैं अपना ग़म किसी को बता भी नहीं सकता
वो ख़्वाब जो हर आँखों से चुरा लिया ज़माने ने
मैं ऐसे ज़माने को छोड़ कर जा भी नहीं सकता
की तुम मेरी हो तो फिर मेरी ही रहना
मैं किसी और का साथ अब निभा भी नहीं सकता।
#आकाशा।।