बाली उमर की लड़कियाँ

देखती हैं ख़्वाब

शहज़ादों के

राजकुमारों के

महलों के

चाँद-सितारों के

मुहब्बत के

क़ुरबत के

महबूब की हसरत के।


वे करती हैं उम्मीद

साथ की

एहसास की

वादों की

इरादों की

और कुछ जज़्बातों की

सच्चाई की

अच्छाई की

इश्क़ की

रहनुमाई की।


बाली उमर के लड़के

चाहते हैं देखना

लड़कियों की वासना

चाहते हैं छूना

उनके जिस्म को

वे नहीं समझते

इश्क़ क्या चीज़ है

हवस उनका प्रेम है

नग्न जिस्म उनका प्यार।


बाली उमर के लड़के

अक्सर तोड़ देते हैं

लड़कियों के ख़्वाब को

रौंदते हैं पाँव तले

उनकी उम्मीद को

लड़कों पर नहीं लगता

 कोई भी कलंक कभी

लड़कियाँ श्राप हैं

यदि ना ब्याही जाएँ

लड़कियाँ पाप हैं

यदि प्रेम में पड़ जाएँ।


उलझे हैं जिस्मों में

वासना-ओ- प्यास में

रिवाजों में

समाजों में

हाँ और ना में

प्रेम और धर्म में

उम्र और कर्म में

चाहत में

सुरूर में

ख़ूबसूरती के ग़ुरूर में

बाली उमर के लड़के

और

बाली उमर की लड़कियाँ।