यूँ ही नही करता कोई खुदकुशी

जब नही रहती कोई खुशी

तब ही करता हैं कोई खुदकुशी


तोड़ दिए जाते हैं सपने

जीते जी मार दिया जाते है

खुद नही मरता कोई

उसे मार दिया जाता हैं


दी जाती हैं उड़ान फिर

पंखों को काट दिया जाता है

कोशिश मरते दम तक करता हैं इंसान

लेकिन बंदिशों में कैद हो जाता हैं

तीर जैसा आत्मा को चीड़ जाता है

कोई यूँ ही नही मरता उसे मार दिया जाता हैं

कोई यूँ ही नही मरता उसे मार दिया जाता हैं


" रिया तिवारी "