जी रहा हूँ मैं जिन्दगी कुछ इस तरह से... 
 आसियाने की तलाश में भटकता है पंछी जिस तरह से...
भूल जाता हूँ लेना साँस तेरी यद् आने पर...
कि कहिं फिर से न दूर हो जाये तू मेरे पास आने पर...
दूर गगन में शायद नया एक तारा निकला है...
  आज फिर किसी के आंसुओ का समंदर पिघला है...
मैं तो हूँ नासमझ, ऐसा आपने समझा मुझे...
ये आपका ही कसूर है कि देख मुझे लेते है सब मजे...
 छीन ली है आपने मेरी जिन्दगी कि रौनक... कितना ही अच्छा होता, अगर ले लेती ये जिन्दगी ही अब तक...
लेकिन.. लेकिन.. लेकिन.. लेकिन...
ये जिन्दगी नहीं है इतनी सस्ती...
हममे भी बाकी है अभी तक कुछ हस्ती...
 'हम होंगे कामयाब', देख लेना आप भी....
ढूंढने से भी नजर नहीं आयेंगे तब हम कभी...
 आपके लिए ये पहला और आखरी सन्देश है हमारा...
एक बार पलटकर जिन्दगी में देखना जरूर मुझे दोबारा...
मैं मिलूँगा तुझे एक ऐसे मुकाम पर...
  कि सारी दुनिया देगी तुझे मेरे आने कि खबर !