अब संभाल लेना बात को तुम ही मेरे सजन|
महफिल में दिखा बैठा अपना मैं दीवानापन||

बहारों में तेरा नाम पूछा मैंने बतलाया सुमन|
खयालों में तेरा नाम पूछा मैंने बोला रे दुल्हन|
हो गई हद ही तब तो जब पूछा तेरे भाई ने,
मुझे न कुछ सूझा मैंने कह दिया वो तेरी बहन||

पड़े इतने जूते मुझे कि मैं कर पाया नहीं सहन|
अभी तक दुख रहा है, पोर पोर पूरा मेरा बदन|
अच्छा ही हुआ जो बेलन पड़ा मुझको बीवी का,
लगी चोट, सपना टूटा, बस बच गये हम साजन||
-अजयसिंह गौतम 9300280390 26/10/21