सर्द भोर की लालिमा, चटख धूप खुशरंग चित्रकार रश्मिरथी, नभ साँझ रंगे बहुरंग । श्याम विहग का कूकना, गौरैयों का गान । मूक फुदकती गिलहरियां भ्रमरों का मधुपान । खेत में पकती बालियां, सरसों के पीले फूल । बौर आम के पेड़ पर, ऋतु सृजन अनुकूल | सरस सरस्वती वंदना, ज्ञान कला वरदान । भोग केसरी भात का, मधुर मधुर पकवान | पीले वस्त्र और पुष्प से, किए साज सिंगार | सांस्कृतिक अनुराग है, केसरिया नर-नार |