क्या बात है कि - फिर तुम्हारे दिल ने ग़ज़ल कही सच बताओ हे पति ! कोई और चक्कर तो नहीं ? बरसों बाद - बड़ा रोमांटिक , मूड बनाकर बैठे हो बरसों बाद - आज आकस्मिक, प्यारी बातें करते हो ! बरसों बाद - सुना रहे हो , वही पुराने , मधुर तराने, ये बातें कुछ , अलग सी हैं, जो बरसों से हुई नहीं । सच बताओ हे पति ! कोई और चक्कर तो नहीं ? दोपहर को करके फोन, मेरा तुम हाल पूछते हो, शाम बनेगी आज कौन सी , दाल पूछते हो क्यों झड़ रहे हैं , मेरे इतने बाल पूछते हो, इतने सालों में - मेरे माथे पे बिंदिया दिखी । सच बताओ हे पति ! कोई और चक्कर तो नहीं ?सब्जी में नमक एक दिन, जानकर डाला नहीं, खा गए तुम, स्वाद तुमको आया नहीं, तुमने डांटा नहीं, कुछ कहा भी नहीं, ये हरकतें तुम्हारी, मुझे लगती नहीं सही , सच बताओ हे पति ! कोई और चक्कर तो नहीं ?