रिश्ते तल्ख़ इतने हो न जाएँ , जिगर को फ़ूकें, ज़ुबान जलाएँ | ये धार शब्दों की काटती है, भाई से भाई, बेटों से माएँ | 1 |   है बात कुछ जो, चुभी है गहरी, मगर पीर दिल की, किसे सुनाएँ | यहाँ सारे चेहरे, हैं अजनबी से, कुछ किससे पूछें, किसे बताएँ |2 |   लगी थी ठोकर , संभल गया पर, थी मेरे पीछे, बड़ी दुआएँ | दूर होकर भी, करीब रहना, अजनबी लगें न, नज़र जब मिलाएँ |3|   बहुत से क़िस्से हैं खट्टे मीठे , कभी हंसाएँ, कभी रुलाएँ | बड़ा ही मुश्किल ये फ़ैसला है किसे याद रखें , किसे भुलाएँ |4|   अलग सा चैन-ओ-अमन यहाँ है, इस शहर की हैं अलग अदाएँ | मिट्टी है घर की, अलग महक है, अलग है रंगत , अलग हवाएँ  |5|