आसमाँ की बुलंदी पर चढ़ी कुछ ख्वाहिशें हैं | कोशिशें हैं, रंजिशें हैं,  साज़िशें हैं  || पिघले हुए रिश्ते हैं, तल्ख़ लफ़्ज़ों की तपिश है, बर्फ से जज़्बात हैं, और फरेबी बारिशें हैं || किसको फ़ुर्सत है कि दम भर साथ दे दे मुफ़लिसी मे, हर शख्स है मजबूर, सब पर बंदिशें हैं || हुनर इतना नही, कि किसी से बात भी कर ले, उसकी जेब में लेकिन बहुत सिफारिशें हैं  || ये भी अज़ब अंदाज़ है, माँगने का, धमकियों के साथ, यूँ कहिए कि हुक्म है, न कि ये गुज़ारिशें हैं || मासूम बच्चों की मगर ये मीठी बातें, अखरोट है, बादाम है, या किशमिशें हैं || जो भी कुछ हूँ आज मैं, सब तेरी रहमत है, है करम मुझ पर तेरा, ये तेरी नवाज़िशें हैं ||