
1.
जाग उठें श्री राम ह्रदय में,
कैसा दृश्य विहंगम हो ।
राम नाम का हो आराधन
राम धुनि की सरगम हो ।।
पुनः जगें श्रीराम, समर हो,
नाश अधम का उत्तर हो
पुनः धर्म की हो स्थापना,
नव संस्कृति तब उद्गम हो ।
2.
जागृत हों श्रीराम, अगर हो
बाण धनुष लेकर अपना
पुनः करें राज्य स्थापित,
अयोध्या में सुर संगम हो ।
मन के नयन खोल कर देखो,
जय
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