भूख सत्ता की सताने लग गयी है अब धर्म भी संसद बनाने लग गयी है, बाँट देंगे, काट देंगे, लूट कर ले जाएँगे, इनकी नीयत रंग दिखाने लग गयी है |   घायल पड़ी यह पुण्यभूमि चीखती है. लाचार बेबस रक्त रंजीत दीखती है | नोच कर ले जाएँगे ये गिद्द भूखे, इनके मुँह मे लार आने लग गयी है ||