आओ भैया आग लगा दो,

जा डरी सबई की संपत्ति ।

सब दुकान में लूघर धर दो,

नइयां काऊ खो आपत्ति ।। 

आओ बार दो चाट को ठेला,

भेल ,चाप, फुलकी वारो,

फुलकी कम और पानी ज्यादा,

तुमने हमने खूब डकारो 

पान को खोका, बीच टिगड्डा ,

चलो फोर दे लाठियन से,

इतयी पान की बना गिलौरी,

रंगी सड़क बेजा मन से । 

आओ मचा दो धमाचौकड़ी,

खूबई ऊधम पाट करो

मारो पीटो जौन मिले से,

गदर मचा उत्पात करो 

लेओ लूट लो जैन किराना,

जो चल रई है घाटे में

खूब उधारी ले लें तुमने,

महीना के महीना काटे हैं 

काय छोड़ रये मेडिकल जा,

इ में भी आग लगा डारो ।

कपडा वारी, फोन दुकानें,

सबको अबई मिटा मारो । 

सबने लड़कै लगवाये हैलोजन,

बजार में करबे उजियारो ।

मार के लुडिया फोर दे

इनको, फैला दे फिर अंधियारो ।

 गाडी फोरो, सड़के खोदो,

बिल्कुल ने रईओ बंधन में

रोको रेल, कछु ने छोडो ,

अपने विरोध प्रदर्शन में । 

आज शहर में कल गलियन में,

परों घरों तक आ जे है,

जहर फ़ैल है तो न सोचो,

कोनऊ कछु बचा पे है । 

मिट जे है कैयन की रोजी,

हो जे हैं कंगाल कई ।

जो कछु मिटा हो बो बनबे में,

लग जे हैं फिर साल कई, 

तुमाये पड़ौसी व्यौहार तुमाओ

प्यार से रे हो तुमाई बरकत

नुकसान तुमाओ, तुमाई आफत,

शहर तुमाओ, तुमाई इज्जत