
आओ भैया आग लगा दो,
जा डरी सबई की संपत्ति ।
सब दुकान में लूघर धर दो,
नइयां काऊ खो आपत्ति ।।
आओ बार दो चाट को ठेला,
भेल ,चाप, फुलकी वारो,
फुलकी कम और पानी ज्यादा,
तुमने हमने खूब डकारो
पान को खोका, बीच टिगड्डा ,
चलो फोर दे लाठियन से,
इतयी पान की बना गिलौरी,
रंगी सड़क बेजा मन से ।
आओ मचा दो धमाचौकड़ी,
खूबई ऊधम पाट करो
मारो पीटो जौन मिले से,
गदर मचा उत्पात करो
लेओ लूट लो जैन किराना,
जो चल रई है घाटे में
खूब उधारी ले लें तुमने,
महीना के महीना काटे हैं
काय छोड़ रये मेडिकल जा,
इ में भी आग लगा डारो ।
कपडा वारी, फोन
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