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संस्कार

जब पति और पत्नी ज्यादातर समय लड़ने और झगड़ने में लगाते हैं तो उनकी इस लड़ाई का उनके बच्चों पे बहुत बुरा असर पड़ता है. घरेलु तनाव का माहौल संतानों की प्रगति में बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न करता है. मैंने ये हास्य कविता घरेलु तनाव के माहौल में पल रहे एक बच्चे की नजरिये से लिखा है. मैंने जानबुझकर हल्के फुल्के अंदाज में अपनी कविता को प्रस्तुत किया है ताकि जो कहना चाहता हूँ वो पाठक गण तक हल्के फुल्के अंदाज में पहुँच सके. 
 
संस्कार
 
क्या कहूँ जब पापा और माँ झगड़ रहे थे ,
बिजली कड़क रही थी , बादल गरज रहे थे.
इधर से दनादन थप्पड़ , टूटी थी चारपाई ,
उधर से भी चौकी और बेलन बरस रहे थे.
 
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