
जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,
ये तुमपे कैसे खर्च करो।
या जीवन में अर्थ भरो या,
यूँ हीं इसको व्यर्थ करो।
तुम मन में रखो हीन भाव,
और ईक्क्षित औरों पे प्रभाव,
भागो बंगला गाड़ी पीछे ,
कभी ओहदा कुर्सी के नीचे,
जीवन को खाली व्यर्थ करो,
जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,
ये तुमपे कैसे खर्च करो।
या मन में अभिमान, ताप ,
तन में तेरे पीड़ा संताप,
जो ताप अगन ये छायेगा,
तेरा तन हीं जल जायेगा,
अभिमान , क्रोध अनर्थ तजो,
जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,
ये तुमपे कैसे खर्च करो।
जीवन मे होती रहे आय,
हो जीवन का ना ये पर्याय,
कि तुममे बसती है सृष्टि,
कर सकते ईश्वर की भक्ति,
कोई तो तुम निष्कर्ष धरो,
जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,
ये तुमपे कैसे खर्च करो।
धन से सब कुछ जब तौलोगे,
जबतक निज द्वार न खोलोगे,
हलुसित होकर ना बोलोगे,
चित के बंधन ना तोड़ोगे,
तुममे कैसे प्रभु आन बसो?
जीवन ऊर्जा तो एक हीं है,
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