अदा भी सनम के , 
क्या खूब है खुदा मेरे।
लेके दिल पूछते है ,
क्या दिल से चाहता हूँ।
 
जो दिल ही दे दिया है ,
तो दिल की इस बात को।
दिल से  जताऊं कैसे ,
कि दिल से चाहता हूँ।
 
ये दिल जो ले गए हो ,
दिमाग भी ले जाओ।
मेरी जमीं तुम्हारी ,
आकाश भी ले जाओ।
 
बस एक जनम की,
चाहत नहीं है मुझको ।
लगता है मुझको ऐसे, 
सदियों से चाहता हूँ ।
 
फिदा थे तुमपे पहले ,
फिदा है तुमपे अबतक।
और चाहुँ क्या तुमसे ,
क्या कहना चाहता हूँ।
 
समा जाए तू  मुझमे , 
समा जाऊँ मै तुुुझमें।
बस इतना चाहता हूँ , 
बस इतना चाहता हूँ।
 
 
अजय अमिताभ सुमन
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