मैं किसान हूं।
याद है या भूल गए मुझे तुम।
हां,,,पता है मुझे हर बार की तरह
इस बार भी भूल ही गए होगे मुझे तुम।
कहां याद रहता है तुम्हें मेरी क्रांति!
चलो...
आज मैं फिर से तुम्हें याद दिला देता हूं।
मैं अपनी इतिहास तुम्हें बता देता हूं।
तो सुनो...
मैं क्रांतिवीर हूं, मैं किसान हूं।
सदा क्रांति की नई-नई गाथा लिखता हूं।
अपनी सुर्ख लाल रक्त की स्याही से
अपने लिए नहीं...
135 करोड़ भाई- बहनों के लिए।
मैं कभी यह नहीं देखता कि
तुम किस जाति के हो,
किस मजहब के हो,
या किस नस्ल के हो?
बिना भेदभाव के सिर्फ क्रांति लिखता हूं।
तो सुनो...
मैं क्रांतिवीर हूं, मैं किसान हूं।
सदा क्रांति की नई-नई गाथा लिखता हूं।
जब देश में अन्न के लाले पड़े थे;
और छटपटा रहे थे भूख से व्याकुल होकर
देश के 135 करोड़ बच्चे, बूढ़े और नौजवान।
तब हमने ही नई क्रांति लाया था-
वो 1964-65 की श्वेत क्रांति;
वो 1966-67 की हरित क्रांति;
वो 2013-14 की पीली क्रांति;
और नीली क्रांति।
ये सारी क्रांतियां हमने ही लिखे थे;
और आगे भी न जाने कितने
अगिणत नई - नई क्रांति लिखेंगे;
अपनी सुर्ख लाल रक्त की स्याही से।
अपने 135 करोड़ भाई-बहनों के लिए।
पर आज मन बहुत दुःखी और व्यथित है।
भूला दिया तुमने हमारे सारे योगदानों को;
और करने लगे तुम अपनी गंदी और नीच राजनीति
बस सत्ता की कुर्सी के खातिर।
तुमने यह गंदी और नीच राजनीति पहली बार नहीं की है
सदा करते थे और अब भी करते हो।
तुम कभी किसानों के हितैषी थे ही नहीं।
कभी तुमने किसानों के जमीन लूटे
तो कभी आशियाना तक तोड़ डाले।
तुम्हारी नीति और नीयत ही गंदी है।
सदा मिलकर तुम पूंजीपतियों के साथ लूटते हो
किसान के जल, जमीन और जंगल को।
अब तुम भी कान खोलकर सुन लो!
हम किसान भी तुम्हारे गंदे
नीति और नीयत से पूरी तरह अवगत हो गए हैं
अब हम तुम्हारे किसी भी जुमले में फंसने वाले नहीं हैं
फिर से अब हम नई सुर्ख लाल क्रांति लिखेंगे
और तुम्हारी सत्ता गिरा देंगें।
मैं क्रांतिवीर हूं, मैं किसान हूं।
सदा क्रांति की नई-नई गाथा लिखता हूं।
©️®️ अजय कुमार सामाजिक यायावर


