देखता हूँ

अपनी परी को बढ़ते

हर रोज

धीरे-धीरेे


करता हूँ

अपनी लाडली से

ढेर सारी बातें

औ' सुनता हूँ

उसकी मनभावन हँसी


देखती है वह भी

मेरे चेहरे की झुर्रियां

लबों की मुस्कान

औ' सुनती है मेरी आवाज़


दोनों ही

मिलते हैं प्रतिदिन

जीते हैं थोड़ी-थोड़ी

सी ज़िन्दगी

खेलते हैं एक साथ।


मोबाइल के सहारे

कभी तस्वीरों में

कभी वीडियो पर।