गिर पड़ी थी
धरा पर
जख़्म खा कर
लावारिस की तरह।
रिस रहा था
रक्त
बूँद - बूँद
घायल तन से।
हो रही थी धरा
लाल,
मर रही थी
इंसानियत
खंड - खंड में।
बुद्धिजीवी लोग
दूर खड़े
वीडियो बना रहे थे
पत्रकारिता और
लाइक, कमेंट के लिए।


गिर पड़ी थी
धरा पर
जख़्म खा कर
लावारिस की तरह।
रिस रहा था
रक्त
बूँद - बूँद
घायल तन से।
हो रही थी धरा
लाल,
मर रही थी
इंसानियत
खंड - खंड में।
बुद्धिजीवी लोग
दूर खड़े
वीडियो बना रहे थे
पत्रकारिता और
लाइक, कमेंट के लिए।