1 min read 801.7K reads

कल्पना


जैसे,हवाध्वनिप्रकाशदिखता नहींपर यथार्थ है।वैसे ही तेराहोनाअहसाससपनेबातेंयथार्थ है।मेरी सांसों की तरहतू भी यथार्थ है,मुझमें,दिखती है तेरी आभामेरी हर कविता मे।

Read more Earn more Learn more