तूफान उठा है जीवन में तेरी याद का देखो यारों।
रहते थे साथ कभी हम, बिछड़ गए हैं सारे।
मंज़िल थी एक सभी की मिल जाते थे सारे।
कोई है डॉक्टर, कोई इंजीनियर, कोई कमाता पैसे हर पल।
भूख है सबकी एक ही जैसी कोई दिखाता कोई छुपाता हर पल।
याद का देखो तूफान उठा है, तू भी सबको भूल चुका है।
याद में जीना आता है अब, ज़ख्मों को सहना आता है अब।
यार का दिया ज़ख़्म था जो वो तो मैं भूल गया हूँ।
बेरुखी देखो यारों की ये ना मुझको जीने देती।
तूफान उठा है जीवन में तेरी याद का देखो यारों।
रहते थे साथ कभी हम, बिछड़ गए हैं सारे।
मंज़िल थी एक सभी की मिल जाते थे सारे।
कोई है डॉक्टर, कोई इंजीनियर, कोई कमाता पैसे हर पल।
भूख है सबकी एक ही जैसी कोई दिखता कोई छुपाता हर पल।
सपने लिए बैठे हैं, यादें लिए बैठें।
कभी खास थे सारे यार।
आज यार भी देखो पैसे लिये बैठें हैं
अजय किशोर


