गरिबी का मौसम भी अजीब होता है!
होती है खुशी दौलत में ओर बद नसीबी के करीब होता है !
तमन्ना मर जाती है बच्चों की
ओर बापु का खुन पसीना होता है!
होती है खुशी दौलत में ओर गरिबी के करीब होता है!
साथियों की कीम्ती वस्तु देख मन लल्चाता है!
ईमानदारी का दामन गरीब छोड़ नहीं पाता है!
गरिबी का मौसम भी अजीब होता है!
इन्सानियत जीवित है समाज में इनके !
वर्ना अमीरों में तो अपनो को भी पैसों में तोला जाता है !
मेहनत का पाठ ये पडाते हैं !
चुनोतियों से भरे इस जीवन मैं
उसुलों की पत्वार चलाते हैं !
ख्वाहिशों को मार कर जीना इन्हें आता है!
साथ देते हें दूसरों का मोके पर खुद अकेला रह जाते है!
गरिबी का मौसम भी अजीब होता है!
होती है खुशी दौलत में ओर गरिबी के करीब होता है !
तमन्ना मर जाती है बच्चों की
ओर बापु का खुन पसीना होता है!
(अजय किशोर)
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