हिन्दू हो या मुस्लिम हर कोई भड़क रहा है। दूसरे धर्म को खत्म करने के लिए डग्ग पर खड़ा है। हिंदुस्तान की पहचान है अनेकता मैं एकता। आज ये पहचान, हिंदुस्तान खतरे मैन खडा है। सभी चाहते हैं शांति से रहना। फिर क्यों हर कोई तलवार लिए खड़ा है। हर धर्म का ठेकेदार सुरक्षित पहरे में है। धर्म के नाम पर काटने ओर कटने को, बस आम इंसान ही रह गया है। विकास की चाह रखने वालों के हाथ में थमा दिए हथियार। मंदिर और मस्जिद के नाम पर कर दिया नर संघार। आग भड़काने वाले आज सुखी हैं। बातों में बहकने वालों का परिवार दुखी है। क्यों भटक जाते हो, भटकाने से किसी  के। साथी है हर धर्म सभी के। मुश्किल की घड़ी में देते है साथ पड़ोसी। धर्म के नाम पर भूल गए अहसान सभी के। जब रोये थे बच्चे तेरे संभाले थे इन्हीं ने। तब नहीं देखा धर्म, ना पूछी जात। आज बस किसी के कहदेने भर से भूल गए  भाइयों का साथ।

हिंदुस्तान की पहचान है अनेकता मैं एकता। आज ये पहचान, हिंदुस्तान खतरे मैन खडा है।