शहर शहर सन्नाटा क्यों है।
इंसान को गलत आदतों पर गुमा क्यों है।
एक गलती छुपाने को।
करता है वो बार बार गलत।
सही को दबाने की लगी है ये कैसी लत
शहर शहर सन्नाटा क्यों है।
शहर में हर इंसान मुर्दा क्यों है।
ऐसा भी क्या डरना।
ऐसा भी क्या हटना।
अंजान की मदद करने में ये।
शहर इतना घबराता क्यों है।
ये शहर है घर अपना।
हर धर्म के लोग बास्ते हैं।
सबकी सुनते सबकी करते।
सबके सुख में हस्ते रहते।
काश ऐसा हो पाता।
तो कोई कभी न कह पता।
शहर शहर सन्नाटा क्यों है।
इंसान को गलत आदतों पर गुमा क्यों है।
अजय किशोर (दिल की आवाज)
Mob. 9999191546

